क्या रुक पाएगा पानी का बाज़ारीकरण

पानी की बाजारगीरी के कारण देश में आज पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। आज देश में पानी के बाजारीकरण से कहीं सूखा है तो कहीं बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आयोजित सफाईगीरी अवॉर्ड्स के पांचवे संस्करण में जल संरक्षणकर्ता राजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार सिर्फ मंत्रालय का नाम बदल रही है। सरकार के जरिए सिर्फ नामकरण ही किया जा रहा है।

उन्होंने  कहा कि लोगों के घरों में नल तो लग जाएगा लेकिन नल में जल कहां से आएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों के नामकरण से कुछ नहीं होगा, हर दिन 14 हजार पेड़ काटे जा रहे हैं।  बिना पेड़ लगाए पानी को नहीं बचाया जा सकता। उन्होंने कहा कि पानी को बचाना है तो जमीनी स्तर पर काम करना होगा।

वॉटर वारियर अवार्ड

इस मौके पर  ‘वॉटर वारियर अवार्ड’ वाटर लिटरेसी फाउंडेशन को मिला। अयप्पा मैसेगी को ये अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। वहीं पानी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अगर बारिश के पानी को बचा लिया जाए तो हर दिन त्योहार होगा। उन्होंने कहा कि वाटर लिटरेसी से ही पानी की गरीबी को खत्म किया जा सकता है।

चीयर्स डेस्क 

loading...
Close
Close