कोका कोला का सिकुड़ता बाजार, काॅफी पिलाने की तैयारी

कोका कोला ने भारत के बड़ेे हिस्से में बेवरेज का बाजार ही नहीं बढ़ाया बल्कि भारत जैसे पारंपरिक देश में शर्बत पीने की आदत को भी बदल दिया। जब तक कोका कोला यहां नहीं आया था, शर्बत ही बाजार पर राज करते थे। लगभग पूरे भारत में पीने की आदत को नए आयाम देने के बाद अब कोका कोला ने काॅफी के बाजार पर भी हाथ साफ करने की योजना बनाई है।

देश में मशहूर कैफे काॅफी डे सीसीडी चेन को खरीदने के लिए कोका कोला ने पहल कर दी है। पहले यह डील इसलिए नहीं हो पाई थी क्योंकि कोका कोला 1750 सीसीडी आउटलेट को चलाने वाली कंपनी में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदना चाहती थी जबकि इसके मालिक सिद्धार्थ इसमें छोटी हिस्सेदारी बेचकर कंट्रोलिंग स्टेक अपने पास रखना चाहते थे। लेकिन सिद्धार्थ की मौत के बाद अब कोका कोला सीसीडी चेन में हिस्सेदारी बेचने के लिए दोबारा बातचीत शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

सीसीडी भी इसके लिए तैयार नजर आ रहा है क्योंकि इससे ग्रुप पर कर्ज का बोझ और घटाने में मदद मिलेगी। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ग्रुप की एक और कंपनी सिकल लॉजिस्टिक्स भी विनिवेश की योजना पर काम कर रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि वह सौदे के लिए कॉफी चेन की कीमत 8000-10000 करोड़ रुपये लगाने की मांग कर रहे थे।

कोका कोला देश में तेजी से बढ़ रहे कैफे बिजनस में पांव जमाना चाहती है क्योंकि कार्बोनेटेड ड्रिंक के उसके मुख्य बिजनस में सुस्ती बनी हुई है। इस खबर के बारे में पूछे गए सवालों का कोका कोला इंडिया और सीसीडी ने जवाब नहीं दिया। अगर यह सौदा होता है तो इससे कॉफी डे ग्रुप की वैल्यू बढ़ेगी जिसे देश में स्टारबक्स का जवाब कहा जाता है। हालांकि, अभी यह ग्रुप वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है।

कोका कोला और कॉफी डे के बीच जून में हुई बातचीत से संपर्क सूत्र ने तब बताया था कि सीसीडी के मालिक कॉफी बिजनस के लिए बिक्री की पांच गुनी कीमत मांग रहे हैं। मार्च 2020 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में ग्रुप के कॉफी बिजनस से 2250 करोड़ रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। यह जानकारी कंपनी के एक आला अधिकारी ने दी है। इस बिजनस में कॉफी बीन के निर्यात का कामकाज भी शामिल है, जिससे वित्त वर्ष 2018 में 1777 करोड़ और 2019 में 1814 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी। देश भर में 1750 कैफे कॉफी डे के स्टोर के अलावा कंपनी की 60 हजार वेडिंग मशीनें भी लगी हुई हैं।

कंपनी के आउटलेट्स वियना, चेक रिपब्लिक, मलेशिया, नेपाल और इजिप्ट में भी हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सीसीडी और कोका कोला के बीच सौदा होता है तो इससे अमेरिकी बेवरेज कंपनी का बिजनस डायवर्सिफाई होगा। उनके मुताबिक, भारतीय अब अधिक चीनी वाली ड्रिंक बहुत पसंद नहीं कर रहे हैं। कोका कोला ने पिछले साल बिजनस को डायवर्सिफाई करने का ऐलान भी किया था। उसने 2018 में 5 अरब डॉलर में कोस्टा कॉफी को खरीदा था। इसके पीछे की कहानी सिर्फ इतनी है कि भारत के बाजार में कोका कोला बाजार में सेचुरेट कर चुका है, उसे बाजार में बने रहने के लिए किसी अन्य क्षेत्र में उतरने की जरूरत है।

चीयर्स डेस्क

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