किस प्रदेश में है पानी पर सेना के जवानों का पहरा

मध्य प्रदेश में जलसंकट की स्थिति इतनी गंभीर है कि जलाशयों पर सेना के जवानों को पहरा देना पड़ता है। राजधानी भोपाल से 126 किलोमीटर दूर सागर जिले में स्थित सेना की छावनी और आसपास के 12 गांवों के लोग एक ही जलाशय पर आश्रित हैं। यही जलाशय चितोरा स्टॉपडैम सेना और ग्रामीणों में विवाद का कारण बना हुआ है। हालांकि, पूरे विवाद पर सागर जिला कलेक्टर प्रीति मैथिल का कहना है कि प्रशासन इस मामले को देख रहा है।

मामला ऐसी स्थिति में पहुंच गया हैं कि जहां आधा दर्जन सेना के जवानों को स्टॉपडैम की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सेना के लोग बांध के आसपास 12 किलोमीटर की दूरी तक गश्त कर रहे हैं, उन्हें पानी लेने से रोकते हैं। वे कहते हैं कि पिछले एक पखवाड़े में सेना के लोगों ने 14 बिजली चलित पानी पंप और पानी के पाइप जब्त किए हैं।

चितोरा गांव के सरपंच विजेंद्र सिंह ने कहा, सेना के इस असामान्य कदम से खेत की सिंचाई के लिए समस्या पैदा हो गई है। हर साल हम इस बांध के पानी से अपनी फसलों की सिंचाई करते थे, लेकिन इस साल सेना के लोग बेहद सख्त हैं और किसानों को बांध से जुड़ी नहरों का पानी लेने से भी रोक रहे हैं।

वहीं, सेना के अधिकारियों का कहना है कि 1995 में सागर नगर निगम द्वारा जल निकाय को सेना के लिए नामित किया गया था। सागर सेना छावनी के कमांडेंट कर्नल मुनीष गुप्ता ने कहा, यह पहली बार नहीं है जब हमने गश्ती दल की तैनाती की है। हम पानी के हमारे कोटा की रखवाली कर रहे हैं, जिसकी अनुमति सागर नगर निगम ने दी थी। हमें पिछली गर्मियों में पानी की कमी का सामना करना पड़ा था। इसलिए, इस बार पानी की सुरक्षा के लिए सख्त योजना है। जबकि सागर नगर निगम के आयुक्त आरपी अहिरवार ने कहा, यह सच है कि हमने सेना को चितोरा स्टॉपडैम से पानी लेने की अनुमति दी है, लेकिन वे ग्रामीणों को नहरों और बांध से पानी लेने से क्यों रोक रहे हैं। हम मामले में पूछताछ करेंगे।

जिला प्रशासन से गुहार : 
एक किसान जहर सिंह ने कहा, यह जल निकाय इतने सालों से हमारे लिए पीने के पानी का स्रोत है। हमने सेना के खिलाफ जिला प्रशासन के पास शिकायत दर्ज कराई है। हमने जिला प्रशासन से सेना और ग्रामीणों के लिए जल निकाय के पानी का सीमांकन स्पष्ट रूप से करने का आग्रह किया है।

प्रशासन व्यवस्था करे  : 
भाजपा विधायक प्रदीप लारिया ने भी कहा कि किसानों को परेशानी हो रही है और जिला प्रशासन को इसका समाधान करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया, यदि सेना दावा कर रही है कि यह उनका पानी है, तो किसानों की सिंचाई के लिए प्रशासन ने क्या व्यवस्था की है? आगे के टकराव को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा चीजें साफ की जानी चाहिए।

गेहूं उत्पादन भी प्रभावित होगा :
वहीं, सेना के तर्क को खारिज करते हुए कृषि विभाग के उपनिदेशक जीडी नेमा ने कहा, यह सेना द्वारा एक अतार्किक कदम है क्योंकि इस वर्ष जिले में 1717 मिमी वर्षा हुई, जो औसत वर्षा 1124 मिमी से अधिक है और जल संकट का कोई डर नहीं है। अच्छी वर्षा के कारण रबी फसल का बुवाई क्षेत्र तीन लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.5 लाख हेक्टेयर हो गया है। अगर किसानों को पानी नहीं मिला, तो इससे गेहूं का उत्पादन प्रभावित होगा।

चीयर्स डेस्क 

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