किसे था शराब से हाथ धोने का शौक

शराब पीने के अलावा राजाओं के हाथ धोने के भी काम आती रही है। साठ के दशक में रोमानिया में निकोलस चाचेस्कू ने लगातार 25 सालों तक न सिर्फ अपने देश के मीडिया की आवाज नहीं निकलने दी बल्कि खाने, पानी, तेल और यहाँ तक कि दवाओं तक पर राशन लगा दिया। यह जानकर आश्चर्य होता है कि यह तानाशाह दिन में कई बार हाथ धोता था और सिर्फ शराब से ही हाथ धोता था। रोमानिया में तरह तरह की पाबंदियां लगा देने का नतीजा ये हुआ कि हजारों लोग बीमारी और भुखमरी के शिकार हो गए और उस पर तुर्रा ये कि उनकी खुफिया पुलिस सेक्योरिटेट ने लगातार इस बात की निगरानी रखी कि आम लोग अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रहे हैं।

नाटे कद के चाचेस्कू का क़द था मात्र 5 फीट 4 इंच, इसलिए पूरे रोमानिया के फोटोग्राफरों को हिदायत थी कि वो उनकी इस तरह तस्वीरें खीचें कि वो सबको बड़े क़द के दिखाई दे। 70 की उम्र पार हो जाने के बाद भी उनकी वही तस्वीरें छपती थीं जो उनकी 40 साल की उम्र में खीचीं गई थीं। एलीना को तो ये तक पसंद नहीं था कि कोई सुंदर महिला उनके बगल में खड़े हो कर तस्वीर खिंचवाए। उसकी पत्नी एलीना ने कई विषयों में फेल होने के बाद 14 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी लेकिन रोमानिया की फर्स्ट लेडी बनने के बाद उन्होंने ऐलान करवा दिया था कि उनके पास रसायन शास्त्र में पीएचडी की डिग्री है।

जाहिर है ये डिग्री जाली थी। चाचेस्कू रोमानिया को एक विश्व शक्ति बनाना चाहते थे। इसके लिए जरूरी था बड़ी जनसंख्या का होना। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने एबॉर्शन यानी गर्भपात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी वजह से पूरे रोमानिया में तलाक़ लेना भी मुश्किल बना दिया गया था। चूंकि चाचेस्कू छोटे क़द के थे, वो हर चीज बड़ी पसंद करते थे। उन्होंने राजधानी बुखारेस्ट में अरबों डॉलर ख़र्च कर पीपुल्स  हाउज बनवाया था जिसका हीटिंग और बिजली का ख़र्च आज के जमाने में लाखों डॉलर का आता है और भवन बन जाने के 25 साल बाद भी इसके 70 फीसदी कमरे अभी तक ख़ाली हैं।

करीब 15,000 मजदूर इस भवन को बनाने में लगे हुए थे और वो तीन शिफ्टों में काम करते थे। वो अक्सर इस भवन का मुआएना करने जाते थे। दिसंबर, 1989 आते आते वो वहाँ सप्ताह में तीन चार बार आने लगे थे। चाचेस्कू की जीवनी द लाइफ एंड ईविल टाइम्स ऑफ निकोलाई चाचेस्कू लिखने वाले जॉन स्वीनी लिखते हैं, 15000 मजदूरों के लिए वहाँ एक भी टायलेट नहीं था।  इसलिए जहाँ भी किसी मजदूर को मौका मिलता, वो अपने आपको हल्का कर लेता। पूरे भवन में बुरी तरह से बदबू फैली हुई थी। जब भी चाचेस्कू के आने की ख़बर मिलती, मजदूरों का एक दल दौड़ कर उस इलाके की गंदगी को साफ कर देता जहाँ चाचेस्कू को जाना होता था।  एक दिन चाचेस्कू साफ किए गए इलाके से थोड़ा भटक गए और ऐसी जगह मुड़ गए जहाँ थोड़ा अंधेरा था। अँधेरे में उनका पैर मल के ढेर पर पड़ा और उनके दोनों जूते इससे बुरी तरह सन गए स्वीनी आगे लिखते हैं, ये देख कर कुछ मजदूरों की हँसी निकल गई।  लेकिन जब  सिक्योरिटी के लोगों ने उन्हें घूर कर देखा तो वो दूसरी तरफ देखने लगे।

सिक्योरिटी का एक बंदा चासेस्कू के जूतों पर लगी गंदगी को साफ करने लगा। चासेस्कू अपने गंदे पैरों के साथ अपनी कार की तरफ बढ़े। जहाँ जहाँ उनके क़दम पड़े, उनके जूतों पर लगी गंदगी के निशान छूटते गए।  किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा। न ही कोई हँसा, मानो कोई एटम बम फूट गया हो। इसीलिए उसे तरह तरह के इनफेक्शन होने का अंदेशा बना रहता था और इन्हीं से बचने के लिए एक दिन में बीस बार अपने हाथ अल्कोहल से धोया करता था।

चीयर्स डेस्क 

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