कारवार की एकमात्र शुद्ध पेयजल इकाई बंद

कर्नाटक के कारवार शहर में रवींद्रनाथ टैगोर तट पर स्थित शुद्ध पेयजल इकाई बंद हो गई है। इससे पर्यटकों, मजदूरों आदि को काफी समस्या हो रही है। नगर परिषद के अनुदान में इस पेयजल इकाई का निर्माण किया गया था जो पिछले एक माह से बंद है। यहां से आमजन को नि:शुल्क पेयजल मिल रहा था। इस इकाई के बंद होने से पैसे देकर पानी खरीदने की अनिवार्य परिस्थिति बनी हुई है।

टूटे हैं दोनों नलकूप

शहर में स्थित यह एकमात्र पेयजल इकाई है। रखरखाव में लापरवाही बरतने के कारण जनता के उपयोग के लिए नहीं आ रही है। इकाई के अंदर वाली मशीन अच्छी है। बाहर लगाए गए दोनों नल कूप टूटे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 66 के फोर लेन सडक़ निर्माण कार्य चल रहा है। सैकड़ों मजदूर सडक़ निर्माण कार्य में जुटे हैं। साथ ही समुद्र से मछली पकडऩे के लिए बाहरी राज्यों से हजारों मछवारे आते हैं। इन लोगों के लिए शुद्ध पेयजल इकाई उपयोगी थी। पर्यटकों को भी पैसा देकर पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है।

मेहंगा पड़ रहा है कैन 

शहर में विविध कम्पनियां 20 लीटर का पेयजल कैन उपलब्ध करती हैं जो काफी मेहंगा है। एक कैन पानी का दर 70 से 8 0 रुपए निर्धारित किया है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सप्ताह में एक से दो कैन प्रति परिवार को जरूरत पड़ती है। गरीब परिवारों के लिए पानी खर्च ही अधिक हो जाता है। दूषित पानी पीने से स्वस्थ्य बिगडऩे की समस्या सताती है।

सिरसी में है, कारवार में नहीं

पेयजल कैन खरीदने पर लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सिरसी में बस स्टैण्ड के पास तथा एपीएमसी के पास शुद्ध पेयजलापूर्ति इकाई है। 5 रुपए शुल्क देने पर 20 लीटर पानी मिलता है, परंतु कारवार में ऐसी कोई योजना ही नहीं है। इससे और समस्या हो रही है। गर्मी के सिजन में अधिकतर घरों के कुओं में पानी सूख जाता है। नगर परिषद की ओर से घर घर पेयजलापूर्ति की जा रही है। गर्मी के सिजन में पेयजलापूर्ति करना ही बडी चुनौती है। पेयजल समस्या होने पर पैसा देकर कैन का पानी मंगवाना पड़ता है।

ग्रामीण इलाकों में उपजा संकट

ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट उपजा है। जिला पंचायत अनुदान में हर ग्राम पंचायत के लिए एक शुद्ध पेयजल इकाई का निर्माण किया गया है। अधिकतर इकाइयां कार्य नहीं कर रही हैं। लाखों रुपए खर्च कर निर्माण किए गए पेयजल इकाइयां बेकार हो गई हैं।

चीयर्स डेस्क 

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