कार्तिक पूर्णिमा का स्नान आप को कर न दें बीमार

कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिंदुओं और सिखों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस दिन सिख समुदाय के लोग प्रकाश पर्व मनाते हैं, गुरुद्वारों को विशेष रोशनी से सजाते हैं, भजन-कीर्तन के साथ लंगर का आयोजन किया जाता है। गुरु नानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारों में मथा टेका जाता है और आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। घरों को भी रोशनी से सजाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा का हिंदुओं में भी बड़ा महत्व है। इस दिन नदियों में स्नान करने, पूजा पाठ के बाद दान करने का विधान है। इस दिन स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का अनन्त फल मिलता है। इसी दिन सायंकाल के समय मत्स्यावतार हुआ था। इस कारण इसमें दिए हुए दान आदि का 10 यज्ञों के समान फल मिलता है।

हिंदू धर्म में गंगा को नदियों में सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त है। मान्यता हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करना पर पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन सच ये है कि गंगा का पानी पीने लायक भी नहीं है। हालत यह हो चुकी है कि समूचे उत्तर प्रदेश में कहीं भी गंगा का पानी सीधे नहीं पिया जा सकता। यह खुलासा हाल ही में सूचना के अधिकार से मिले जवाब में हुआ है।

कार्तिक पूर्णिमा का स्नान आप को कर न दें बीमार

एनजीटी में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने 14 मई 2019 को उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड व पश्चिम बंगाल को आदेश देने के साथ ही अपनी सख्त टिप्पणी में कहा है कि यह गौर करने लायक है कि ‘गंगा देश की राष्ट्रीय नदी है और इसका समूचे देश के लिए एक विशेष महत्व है। यहां तक कि गंगा की एक बूंद भी गंभीरता का विषय है। गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए सभी प्राधिकरणों का रवैया कठोर और जीरो टालरेंस वाला होना चाहिए। साथ ही प्रदूषण को रोकने के लिए बचाव के सिद्धांत का भी पूर्ण पालन होना चाहिए।’

पीठ ने कहा कि ‘गंगा की स्वच्छता को धन उगाही और व्यावसायिक व औद्योगिक धंधे की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता है। यहां तक कि कोई व्यक्ति भी यदि गंगा को प्रदूषित करता है तो उसे कानून के अधीन दंडित किया जाना चाहिए। यही मॉडल देश की समूची नदियों के लिए लागू होना चाहिए। यह बेहद दुखद है कि देश की नदियों के 351 हिस्से प्रदूषित हैं।’

कार्तिक पूर्णिमा का स्नान आप को कर न दें बीमार

हाल ही में याची व पर्यावरणविद विक्रांत तोंगड़ को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने कहा है कि समूचे उत्तर प्रदेश में कहीं भी गंगा का पानी पीने लायक नहीं है।  यूपीपीसीबी की ओर से 10 मई को आरटीआई के जवाब में बताया गया कि यूपी में गंगा का कोई ऐसा स्ट्रेच नहीं है जहां नदी का पानी सीधे पिया जा सकता है। नेशनल वाटर क्वालिटी मानीटिरिंग प्रोग्राम के जरिए 31 स्थानों पर सैंपल लिए गए जबकि यूपीपीसबी ने 2 जगह के सैंपल एकत्र किए हैं। यह नमूने 2014 से 2018 के बीच बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बुलंदशहर, बंदायूं, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, मिर्जापुर, वाराणसी और गाजीपुर से लिए गए।

यह आंकड़े भले 2014 से 2018 के बीच  के हैं, लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता की पिछले एक साल में गंगा और प्रदूषित न हुई हो।  हिन्दू धर्म के सबसे पावन पर्व कार्तिक पूर्णिमा के स्नान को सबसे ज्यादा महत्त्व दिया जाता हैं। लेकिन नदियों को साफ़ करने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है हमें भी जागरूक होना जरुरी हैं।

चीयर्स डेस्क 

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