ऐतिहासिक सरोवर में सूख रहा पानी

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा संभाग के कई क्षेत्रों में गर्मी आते-आते भूमिगत जलस्तर अत्याधिक नीचे चला जाता है और कई क्षेत्रों में तो खनिज मिश्रित जल के निकलने से पीने के पानी की समस्या पैदा हो जाती है, लेकिन जब जल आपूर्ति के संवाहक बने तालाब को भी उपेक्षित कर दिया जाता है तब जन प्रतिनिधियों व प्रशासन की लापरवाही सामने दिखाई पड़ती है।

कुछ ऐसा ही दृश्य दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में बस्तर की आराध्य देवी मंदिर के पास ही स्थित दंतेश्वरी तालाब का हो रहा है। जानकारी के अनुसार कुछ ही अर्से पूर्व इस तालाब के जीर्णोद्वार तथा इसकी सुंदरता बढ़ाने के लिए लाखों रूपए खर्च किए गये थे और तालाब इससे बहुत अधिक संवर गया था, लेकिन इसकी सूरत सुधारने के बाद इसकी कोई सुध नहीं ली गई।

करीब 30 से 35 लाख रूपए व्यय करने और इस तालाब के सौंदर्यीकरण करने के बाद इसकी देखरेख नहीं की गई जिससे यहां चारों तरफ झाडिय़ां उग आई हैं। इस ऐतिहासिक तालाब के पूर्वी हिस्से में लोगों के बैठने के लिए घाटनुमा सीढिय़ां बनाई गईं है और पैगोड़ा के आकार के 3 शेड भी निर्मित हुए थे। इनमें भी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया इसलिए यहां पर भी जंगली झाडिय़ों ने कब्जा जमा लिया है।

यह भी इस सिलसिले में विशेष तथ्य है कि अभी तक इस तालाब को स्थानीय नगर पालिका को टेंपल कमेटी नहीं सौंपा है।  जबकि इसकी देखरेख के लिए यह आवश्यक है। इस संबंध में एसडीएम व टेंपल कमेटी के सचिव लिंगराज सिदार ने जानकारी दी कि कमेटी के लोग भी चाहते हैं कि व्यवस्था में सुधार हो। पालिका को जिम्मेदारी सौंपने के लिए जल्द ही नियम व शर्ते तय की जाएगी। इसके लिए टेंपल कमेटी व पालिका सीएमओ से चर्चा करेंगे।

चीयर्स डेस्क 

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