एक ड्राई डे पर यूपी सरकार को करीब 100 करोड़ का घाटा

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यूपी सरकार को शराब बंदी के कारण करीब 95.89 करोड़ का राजस्व घाटा होता है। स्वतंत्रता दिवस भारत का राष्ट्रीय पर्व है। इस पावन पर्व पर सभी (अंग्रेजी व देशी) शराब के ठेके बन्द रहते हैं। इस शराबबंदी के कारण, सिर्फ यूपी में ही सरकार को लगभग 95.89 करोड़ रुपए का घाटा उठाना होता है। साल में यूपी में करीब एक दर्जन ड्राई डे होते हैं, इस तरह से यूपी सरकार को साल में ड्राई डे से करीब 12 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गौरतलब है कि यूपी सरकार हर साल शराब उपभोक्ताओं से करीब 35,000 करोड़ की कमाई करती है।

यूपी आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 के पहले महीने अप्रैल में आबकारी राजस्व पिछले साल की अपेक्षा 18.21 प्रतिशत बढ़ गया। पिछले साल अप्रैल में सरकार को 2363.60 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि इस साल अप्रैल महीने में 430.46 करोड़ रुपए बढ़ कर यह राजस्व 2794.06 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।इस साल यूपी सरकार ने शराब से रिवन्यू का लक्ष्य 49 हजार करोड़ रखा है लेकिन चुनाव के समय में हुई शराबबंदी और साथ ही ड्राई डे से लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल सा है।

जब चियर्स डाट काम के संवादाता ने लखनऊ लिकर एसोसिएशन के महामंत्री श्री कन्हैया लाल मौर्या जी से इस संबंध में बात कि तो उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा इस तरह से शराब की दुकांने बंद करने से दुकानदारों को खासा नुकसान होता है। छुट्टी होने की वजह से लोग अपने दोस्तो के साथ समय बिताने के लिए बार मेें या घर पर शराब मंगा कर पार्टी करते है लेकिन ड्राई डे के दिन ऐसा नहीं हो पाता क्योंकि शराब की दुकानें बंद रहती हैं।

अवकाश के दिनों में शराबबंदी का कोई वैसे तो औचित्य नज़र नहीं आता क्यांेकि अवकाश के दिनों में ही लोग परिवार के साथ पिकनिक मनाते हैं और दोस्तों के साथ घूमते टहलते हैं। इस मौके पर शराब न मिले, यह अटपटा सा लगता है। हालंाकि पीने वाले जानते हैं कि कब दुकान बंद रहेगी तो एक दिन पहले ही खरीद कर रख लेते हैं। दुकानदार भी एक दिन पहले से ही बोर्ड टांग देते हैं कि ठेका बंद रहेगा। तो लोग खरीद लेते हैं। इसके अलावा चोरी से बेचने वालों और बाॅर में शराब मिल ही रही होती है तो बंदी का कोई खास असर दिखता नहीं है।

श्री मौर्या जी ने बताया कि सरकार हमसे लाइसेंस का साल भर का पैसा जमा करवा लेती है जिसमें ड्राई डे की फीस भी जुडी होती है। जिससे सरकार को तो कोई भी नुकसान नहीं होता है जो भी नुकसान है वो दुकानदारों का ही होता है। सिर्फ ड्राई डे ही नहीं कानून व्यवस्था के नाम पर इलेक्शन में भी सरकार हमारी दुकानें बंन्द करवा देती है जिसका नुकसान हमें ही झेलना पड़ता है। सरकार को हमारे हक और आधिकारों के बारें में सोचना चाहिए।

चीयर्स डेस्क

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