उत्तर प्रदेश में शराब कारोबारियों की दिलचस्पी घटी

उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति में हुए बदलावों के कारण अंग्रेजी शराब व बीयर की दुकानों का लाइसेंस लेने में कारोबारियों के बीच पहले जैसी दिलचस्पी नहीं रही। सरकार का दावा तो रिकॉर्ड राजस्व हासिल करने का है लेकिन नवीनीकरण को लेकर कारोबारियों कि बेरुखी तो कुछ और ही सूरतेहाल बयां कर रही  है। सोमवार इन दुकानों के लाइसेंस के नवीनीकरण का आखिरी दिन था। शाम पांच बजे अंतिम समय सीमा बीतने के बाद देसी शराब की दुकानों के लिए 70 प्रतिशत, अंग्रेजी शराब की दुकानों के लिए 60 प्रतिशत, बीयर की दुकानों के लिए 50 प्रतिशत और मॉडल शाप की दुकानों के लाइसेंस नवीनीकरण के लिए महज 40 प्रतिशत कारोबारियों ने ही आनलाइन आवेदन किया।

लखनऊ में चल रही 162 बीयर की दुकानों में मात्र 85 लाइसेंसधारकों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। बाकी 77 बीयर लाइसेंसधारक 2019-20 में दुकान चलाने से दूर रहे। जिले के 51 मॉडल शाप लाइसेंसधारकों में से मात्र 20 कारोबारियों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। अब बाकी बची दुकानों का व्यवस्थापन आबकारी विभाग ई लाटरी से कराएगा। जिला आबकारी अधिकारी जनार्दन यादव ने बताया कि वर्ष 2018 में ई लाटरी से दिए गए लाइसेंस को 2019-20 में कोटा बढ़ाते हुए नवीनीकरण के लिए आवेदन मांगे गए थे। जिन-जिन दुकानों के नवीनीकरण आवेदन नहीं आए हैं उनके लाइसेंस 31 मार्च 2019 तक वैध होंगे। वहीं जिन दुकानों के नवीनीकरण आवेदन नहीं आए हैं, उन दुकानों के कोटे में बढ़ोतरी की शर्तों को लागू करते हुए ई लाटरी से दुकानों के लाइसेंस देने की तैयारी है। .

शराब की दुकानों का ब्यौरा 

लखनऊ में देशी की 503 दुकानों में 355 दुकानों के नवीनीकरण आवेदन आए। 177 विदेशी दुकानों में 145, 162 बीयर की दुकानों में 85, और 51 मॉडल शाप में 20 मॉडल शाप दुकानों के नवीनीकरण आवेदन 21 जनवरी की शाम छह बजे तक स्वीकार किए गए। प्रदेश में कुल 25,702 आबकारी दुकानें हैं।

इनमें सर्वाधिक 14,467 देसी शराब की, और तकरीबन इतनी ही अंग्रेजी शराब की और 5,770 बीयर की फुटकर दुकानें हैं। कुल 407 मॉडल शाप हैं। आनलाइन आवेदन करने के बाद अब अगले तीन कार्य दिवसों में इन दुकानों के व्यवस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद शेष दुकानों का विज्ञापन निकाला जाएगा। फिर नौ फरवरी से इन बची हुई दुकानों की ई-लाटरी की प्रक्रिया शुरू होगी।.

loading...
Close
Close