आरओ वाटर कैन पर दर्ज नहीं होती जानकारी

आजकल लोगों में साफ पानी के लिए आई जागरूकता के चलते अब आरओ वाटर कैन दुकानों और मकानों का एक जरूरी हिस्सा बन गए  है। लेकिन आरओ वाटर की बढ़ती खपत के कारण शहरों में एक बड़ा तबका बिना नाम-पते और कंटेंट की जानकारी वाला आरओ वाटर बेच रहा है। आरओ कैन के ऊपर से पूरी जानकारी नदारद है। ऐसे में किसी भी समय यदि इस पानी को पीने से स्वास्थ्य बिगड़ता है तो बेचने वाला साफ बचकर निकल जाएगा। इधर आरओ वाटर के नाम पर सामान्य नल का पानी भी कैन में भरकर लोगों को थमाया जा रहा है। दुकानदारों को बड़ी मात्रा में ऐसा पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिसकी कैन पर कोई जानकारी नहीं होती। महीने में एक दिन कैन वाला रुपए ले जाता है। कई जगह तो रसीद भी नहीं दी जाती।

क्या है नियम

रोजाना जिन कैन से पानी सप्लाई किया जाता है, उनपर निर्माता का नाम, शिकायत के लिए नंबर और प्लांट का पूरा पता होना चाहिए। आरओ के नाम पर बेचे जा रहे पानी में शामिल जरूरी अवयवों के अनुपात (इनग्रेडिएंट्स) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। कैन को नियमित धोकर साफ करना चाहिए।

गलियों में चल रहे प्लांट

आलम ये है कि क्षेत्रों में धड़ल्ले से गली-कूचों में आरओ वाटर भरा और बेचा जा रहा है। जांच के लिए अमला पहुंचता नहीं है। दरअसल ये कॉलोनी में इतने अंदर होते हैं कि विभाग और अन्य को भनक तक नहीं होती है। इन गलियों में नल का पानी कैन में भरा जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकारों को सख्त से सख्त कदम उठाने चाहिए।

चीयर्स डेस्क 

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