आरओ वाटर करोबार पहुंचा लाखों में, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

लखनऊ शहर के नलों से अशुद्ध पानी की सप्लाई ने लोगों के खर्च को बढ़ा दिया है। पीने के पानी के लिए लोग या तो अपने घरों में महंगा आरओ लगवा रहे हैं या फिर शहर में आरओ वाटर की सप्लाई करने वाली फैक्टरियों से कैंपर खरीद रहे हैं। अधिकतर लोग वाटर कैंपर ही खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें पानी के लिए हर महीने 5 सौ रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। पानी में बढ़ रही अशुद्धता व टीडीएस की वजह से शहर में आरओ वाटर का कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में आरओ वाटर की आपूर्ति करने के लिए करीबन एक दर्जन फैक्टरियां काम कर रही हैं।

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जैसे जैसे शहर के पानी में टीडीएस बढ़ रहा है और दूषित पानी लोगों को मिल रहा है। वैसे-वैसे शहर में आरओ के पानी का कारोबार बढ़ता जा रहा है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो साल पहले शहर में आरओ वाटर तैयार करने वाली फैक्टरियों की संख्या में दोगुने का इजाफा हुआ है।

दोहरी चपत लग रही है लोगों को

लोगों को दैनिक उपभोग के लिए आपूर्ति लाइन से तो पानी लेना ही पड़ता है। इसके बदले में उन्हें जलकर भी चुकाना पड़ता है। साथ ही पीने के लिए लोगों को आरओ पानी का कैंपर खरीदना पड़ता है। यानी कम से कम लोगों को हर महीने 5 सौ रुपए का अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। यदि कैंपरों की संख्या बढ़ जाती है तो पानी पर ही लोगों को हर महीने एक हजार खर्च करना पड़ता है।

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फैक्टरी में आरओ पानी तैयार करने वाले लोग केवल-केवल पानी का टीडीएस कम कर देते हैं। साथ ही पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन मिला देते हैं। इस पानी में शरीर को जितने मिनरल्स चाहिए, वे नहीं होते। ऐसे में यह पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता।

20  हजार घरों में लगे हैं आरओ सिस्टम

आरओ सिस्टम लगाने का कारोबार करने वाले का कहना है कि शहर में तकरीबन 20 हजार घर ऐसे हैं, जहां पर आरओ सिस्टम लगा हुआ है। यानी 20 हजार परिवार घर में लगे आरओ का पानी ही पीते हैं। आरओ सिस्टम लगवाने के लिए लोगों को 10 से 12 हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। साल में तकरीबन 12 हजार रुपए इसके मेंटेनेंस पर भी खर्च होते हैं।

चीयर्स डेस्क 

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