क्या आरओ पर उठते सवालों का अंत होगा ?

देश में आरओ का चलन तेजी से बढ़ रहा है और बढ़ती स्वच्छ पेयजल की समस्या का निदान ज्यादातर लोग आरओ में ढूंढते हैं। यही कारण है कि शहर और गांव में तेजी से आरओ की मांग बढ़ती जा रही है। (एनजीटी) ने एक फैसले में कहा था कि जहां पानी ज्यादा दूषित या खारा न हो, वहां आरओ के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। इस आदेश के बाद से आरओ को लेकर तमाम विवाद और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। जानिए आरओ के भविष्य और इसकी उपयोगिता पर केंट आरओ के संस्थापक व चेयरमैन  का क्या कहना है।

एनजीटी ने कहा था कि आरओ के इस्तेमाल से पानी की बर्बादी होती है, कितना सही है?
मेरा पहला जवाब ये है कि लोगों को आरओ की जरूरत ही क्यों पड़ी है। अगर सरकार और निकाय लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाएं तो उन्हें आरओ के इस्तेमाल की जरूरत ही नहीं होगी। दूसरा यह कि आरओ से निकले पानी को बर्बादी क्यों कहा जा रहा है, जबकि इसका इस्तेमाल दूसरे कार्यों में किया जा सकता है। मसलन, पौधों में, कपडे धोने में या फिर टॉयलेट में। लिहाजा आरओ पर प्रतिबंध के बजाए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।

जल शुद्धिकरण के समय आरओ से निकलने वाले अतिरिक्त पानी का क्या निदान है?
देखिए, अगर आप 5 लीटर पानी आरओ में डालते हैं तो इससे 2.5 लीटर पानी शुद्ध निकलता है, जबकि शेष में अगुद्धियां द्य होती हैं। इस पानी को आप पी नहीं सकते हैं, जैसा कि मैंने बताया इसका उपयोग अन्य कार्यों में लिया जा सकता है। हालांकि, हम नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं और हमारी कोशिश है कि अशुद्ध पेयजल की मात्रा को 50 फीसदी से घटाकर 30 या 20 फीसदी पर ला सकें।

एनजीटी का फैसला जल संरक्षण से प्रेरित हैं क्या आरओ कंपनियां भी भागीदार बनेंगी?
बिल्कुल द्य हर जिम्मेदार नागरिक और निकाय को जल संरक्षण में भागीदारी निभानी चाहिए। सरकार का मानना है कि एक व्यक्ति पर औसतन 200 लीटर पानी का रोजाना खर्च आता है। मेरा कहना है कि इसमें से पीने में महज 2-3 लीटर पानी का उपयोग होता है। अब जल संरक्षण इस 2-3 लीटर पानी में से ही करना सही रहेगा या पूरे 200 लीटर में से बचाया जाना चाहिए। अगर साफ पानी नहीं पीएंगे तो हजारों बीमारियां घेर लेंगी।

क्या आरओ से पानी शुद्ध करते समय इसमें शामिल अच्छे खनिज निकल जाते हैं?
डब्ल्यूएचओ सहित दुनिया के किसी भी देश ने पानी में न्यूनतम खनिज की मात्रा तय नहीं की है। अगर आपको कैल्शियम लेना है तो आप दूध से लेंगे, मैगगीशियम के लिए केला या अन्य खाद्य पदार्थ का उपयोग करेंगे। तो पानी का इस्तेमाल खनिज के लिए बिल्कुल नहीं किया जाता है।

क्या आरओ से पानी की सभी तरह की अशुद्धियां निकल जाती हैँ.ऑर यह यांव- शहर हर जगह उपयोगी हो सकता हैं?
आजकल नई तकनीक पर आधारित आरओ बाजार में आ रहे हैंय जिसमें अल्ट्रावायलट व अल्ट्राफिल्ट्रेशन जैसी विधियां इस्तेमाल हो रही हैं। इससे कोबाल्ट, आर्सेनिक जैसी खतरनाक अशुद्धियां भी दूर हो जाती हैं। ग्रामीण इलाकों में हम सामूहिक इस्तेमाल के लिए शुद्धिकरण यंत्र लगा रहे जो आर्सेनिक वाले जल को पूरी तरह स्वच्छ कर देते हैं। इस यंत्र को एक जगह लगाकर सामूहिक रूप् से पेयजल की व्यवस्था की जा सकती है।

चीयर्स डेस्क

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