आरओ के फायदे कम नुकसान

नदियों के देश भारत में आप का स्वागत है। अगर भारत की नदियों को साफ़ रखा जाए और उनका सही ढंग से उपयोग किया जाए तो भारत में जल संकट बेमानी सा है।  लेकिन हकीकत कुछ इतर है  भारत में पानी कितना साफ है ये इस बात से समझा जा सकता है कि दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं।  एक तरफ प्रदूषण बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ वाटर प्यूरीफायर की बिक्री भी भारत में बहुत बढ़ रही है। इसमें प्यूरिफायर बनाने वाली कंपनियों का तो फायदा है, लेकिन यकीन मानिए इसमें आम लोगों का बहुत बड़ा नुकसान है।  सोचने वाली बात यह है कि जिस देश में नदियों को भगवान का दर्जा दिया गया है।  वहां पर आप को पानी पीने के लिए वाटर प्यूरीफायर की आवश्यकता पड़ती है।
तो इसमें दिक्कत क्या है?

हेमा मालिनी आकर कहती हैं ‘केंट देता है सबसे शुद्ध पानी’ ये विज्ञापन बहुत सालों से चला आ रहा है।  वाटर प्यूरिफायर को लेकर ऐसे ही कई एड मौजूद हैं। कम से कम 60 कंपनियां भारत में वाटर प्यूरिफायर की सेल करती हैं।

ऐसे ही कई विज्ञापन हमें बताते हैं कि शुद्ध पानी पर हमारा हक है और वो हमें सिर्फ Water Purifier से ही मिलेगा। ये सही है कि शुद्ध पानी पर हमारा हक है, लेकिन वो सिर्फ इन मशीनों से ही मिलेगा क्या? ये नाकामी है इंसानी दिमाग की कि अगर उसे 10 बार एक झूठ बोला जाए तो उसे ही सच माना जाता है।

RO की बिक्री और समस्याओं पर हो चुकी हैं कई रिसर्च

Reverse Osmosis यानी RO एक ऐसा प्रोसेस है जिसमें पानी को प्यूरिफाई किया जाता है ताकि उसमें से कीटाणु और सॉलिड पदार्थ निकाले जा सकें।  लेकिन इस प्रोसेस में जरूरी मिनरल पानी से निकल जाते हैं और हमें मिलता है मरा हुआ पानी।  भारत की बात करें तो यहां वाटर प्यूरीफायर  मार्केट 24% की दर से आगे बढ़ रहा है। अगले दो सालों में ये सेल 2.5 मिलियन यूनिट से भी ज्यादा आगे बढ़ जाएगी।  ये तब है जब आगरा, जोधपुर, वाराणसी, उदयपुर जैसे कई शहरों में भी अब इसकी बिक्री बढ़ गई है।  केंट जो भारत में 40% मार्केट पर कब्जा किए हुए है उसका टर्नओवर 1000 करोड़ से भी ज्यादा हो गया है।

NGT  की रिपोर्ट बताती है वाटर प्यूरिफायर की समस्याएं

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  यानी NGT ने सरकार को निर्देश जारी करते हुए एक रिपोर्ट तैयार की थी।  ये इसलिए ताकि आरओ सिस्टम का अति में होने वाला इस्तेमाल कम हो सके।  रिपोर्ट में साफ तौर पर निर्देश दिए गए थे कि जहां भी पानी में सॉलिड (TDS) की मात्रा 500mg प्रति लीटर से कम हो वहां पर आरओ सिस्टम का इस्तेमाल बैन हो जाना चाहिए।  इसी के साथ, रिपोर्ट में ये भी लिखा था कि सरकार लोगों को बिना मिनरल वाला पानी पीने के दुष्परिणामों के बारे में बताए।

इस रिपोर्ट में ये भी लिखा था कि सरकार ऐसा प्रावधान बनाए कि जहां भी आरओ का पानी इस्तेमाल हो रहा है वहां पर 60 प्रतिशत से ज्यादा बर्बाद हुआ पानी वापस इस्तेमाल में लाया जाए।  जैसा कि आपको पता है अगर 1 लीटर पानी वाटर प्यूरिफायर में इस्तेमाल होता है और पीने लायक बनता है तो 1 लीटर ही वेस्ट भी होता है। इस रिपोर्ट में ये भी आया है कि 13 राज्यों के 98 जिलों में पानी में TDS की मात्रा ज्यादा है वहां प्यूरिफायर बहुत जरूरी है, लेकिन बाकी जगह अन्य तरीके भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। WHO की गाइडलाइन के मुताबिक TDS कंटेंट जो 300mg प्रति लीटर के नीचे है वो बेहद अच्छा समझा जाता है और 900mg से ऊपर बहुत खराब और 1200mg से ऊपर को तो इस्तेमाल ही नहीं करना चाहिए।

लेकिन भारत में ऐसे कई शहर हैं जहां ये मात्रा NGT की बताई मात्रा के हिसाब से है फिर भी वाटर प्यूरिफायर का इस्तेमाल इस तरह से हो रहा है कि पानी उसके बिना इस्तेमाल ही नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा होता है तो यकीनन ये बहुत बड़ी समस्या है।  कितना पानी साल में वाटर प्यूरिफायर के कारण खराब होता है? क्या किसी सरकारी विज्ञापन में ये दिखाया गया कि इसके नुकसान क्या हैं या फिर क्या आपके इलाके का नल का पानी शुद्ध है? नहीं बिलकुल नहीं।  ऐसे में क्या उम्मीद की जाए साफ पानी की।  साफ पानी की जगह हम तो शायद सिर्फ समस्याएं ही ले रहे हैं।

आज हम पानी को साफ़ करने के लिए वाटर प्यूरिफायर का प्रयोग कर रहें है कल हम उसमे मिनिरल भी डलवाएंगे फिर आगे चल कर पता नहीं क्या क्या करना पड़े। पहले हम अपने संसाधनों को समाप्त कर रहे है उन्हें गन्दा कर रहे है।  उसके बाद आरओ कंपनी हमारे द्वारा गन्दा किए हुए पानी को हमे ही साफ़ कर के बेच रही है।

चीयर्स डेस्क

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