आबकारी अधिनियम का तस्कर उठा रहे लाभ

उत्तराखंड का आबकारी अधिनियम ही देशी शराब की तस्करी रोकने में बाधक बनने लगा है। हाल ही में किये गए एक्ट में संशोधन के तहत अब किसी को भी 48 पव्वे देशी शराब लेकर चलने और भंडारण करने की छूट मिल गई है, जिसका फायदा शराब तस्कर उठा रहे हैं।

पथरिया पीर कांड में गत दिनों जहरीली शराब पीने से हुई छह की मौत हो गई थी और 10 बीमार पड़ गए थे। इन मौतों के बाद शराब तस्करी रोकने में जुटी पुलिस को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, अब किसी को भी 12 बोतल या 48 पव्वे देशी शराब के भंडारण की छूट दे दी गई है। इसका उद्देश्य भले ही सरकारी ठेकों से शराब की बिक्री को बढ़ा कर अधिक से अधिक राजस्व जुटाना हो, लेकिन असलियत में इसकी आड़ में शराब का अवैध कारोबार तेज हो गया।

शराब तस्कर अब 48 या इससे कम शराब खरीद कर भंडारण कर उसकी कालाबाजारी करने लगे हैं। इस स्थिति में पुलिस उन्हें पकड़ती भी है तो उसके लिए यह साबित करना आसान नहीं होता कि उसने शराब तस्करी या फिर कालाबाजारी के लिए रखी है। हां, उसमें मिलावट की जा रही हो या शीशी की सील तोड़ कर उसकी बिक्री की जा रही हो, तो उस स्थिति पुलिस सख्ती से कार्रवाई कर सकती है। मगर इसका भी पता लगाना आसान नहीं होता।

सजा का कड़ा प्रावधान

अवैध शराब पीने से मृत्यु हो जाने पर तस्कर को सात से 10 साल की सजा तथा पांच लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। अगर इससे विकलांगता होती है तो अपराधी को छह से आठ साल की सजा तथा तीन से पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

अवैध बिक्री 

दून के एसएसपी के अनुसार, शराब की अवैध बिक्री नहीं होने दी जाएगी। नियम-कानून के दायरे में रहते हुए शराब तस्करी के खिलाफ जो कदम उठाए जा सकते हैं, उसके तहत कार्रवाई की जा रही है। इस बारे में सभी थानेदारों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं। वहीं, आबकारी आयुक्त सुशील कुमार के मुताबिक, 48 पव्वे तक शराब रखने की छूट लोगों की सहूलियत के लिए है। इसका नाजायज फायदा उठाया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।

चीयर्स डेस्क 

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