आतंकवादियों ने बंद करा दी थी कश्मीर में शराब की बिक्री

जम्मू कश्मीर, कहने को तो वहां पिछले सात दशकों से सरकार थी और वह पूर्ण राज्य था जिसे विशेषाधिकार भी प्राप्त थे। लेकिन चलती सरकार की कम ही थी और नब्बे का दशक तो कश्मीर के लिए काला साया बनकर आया जब कट्टर इस्लामिक आतंकवादियों ने कश्मीर घाटी में खुलकर आतंक मचाया और पूरी घाटी में  शराब की दुकानों को तहस नहस कर बंद करा दिया।

कश्मीर  1990 में आतंकवादियों के हाथों बंद कराई गई शराब की दुकानों को फिर कोई सरकार खुलवा नहीं सकी। तब श्रीनगर समेत घाटी की करीब पांच दर्जन शराब की लाइसेंसी दुकानों को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। उनमें आग लगा दी गई थी। शराब की बोतलों की चैराहों पर होली जलाई गई थी। शराब कारोबारियों को जम कर पीटा गया था और उनसे दोबारा यह काम न करने की शपथ ली गई थी। आतंक के इस नंगे नाच का नतीजा है कि उसके बाद श्रीनगर और उसके आसपास के इलाकों में शराब की दुकानों को पुनः खोलने की हिम्मत वहां की सरकार कभी नहीं कर सकी। सरकार चाहें पीडीपी की रही हो या नेशनल कांफ्रेंस की, 1990 से पहले श्रीनगर, पहलगाम और दूसरे पर्यटक स्थलों पर जाने वाले सैलानियों को अपने साथ शराब ले जाने का कष्ट नहीं उठाना पड़ता था।

लेकिन 1990 के बाद हालात इतने खराब हो गए थे कि कुछ वर्षों तक टूर ऑपरेटर और वहां के गाइड स्वयं ही बताने लगे थे कि कृृपया श्रीनगर जाने के लिए अपने सामान में शराब न रखें। हालत यहां तक हो गई थी कि कई वर्षों तक श्रीनगर और उसके आस पास के होटलों में भी शराब मिलना बंद हो गई थी। चोरी छुपे भी शराब नहीं मिलती थी। इतना आतंक था इस्लामी कट्टर  पंथियों का।

श्रीनगर में जब वर्ष 2009 में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा  खुला तो वहां पर शराब की दुकान खोली गई वह भी भारत सरकार की योजना के तहत। लेकिन राज्य की सरकारों ने वहां पर कभी भी शराब की दुकानों को खोलने की हिम्मत नहीं दिखाई। हालांकि 1990 से लेकर दो तीन सालों की बात अगर जाने दें तो ऐसा कभी नहीं हुआ कि कश्मीर गए सैलानियों को शराब नहीं मिली। श्रीनगर और उसके आस पास के स्थानों पर आए सैलानियों के लिए जम्मू से शराब की तस्करी 1990 के बाद से इतनी बढ़ गई कि इसे बाकायदा कुटीर उद्योग का दर्जा हासिल हो गया।

सैकड़ों की तादाद में बेरोजगार नौजवानों ने जम्मू से खरीद कर श्रीनगर और उसके आस पास के होटलों के गाइडों के जरिए सैलानियों को शराब उपलब्ध कराना शुरु कर दिया। जम्मू में शराब की जो जो बोतल 500 की मिलती थी, वही वहां 700 की मिलने लगी। धीरे धीरे यह बात सभी ने समझ ली और एयर रूट से जाने वालों ने एयरपोर्ट से और रेल तथा सड़क मार्ग से जाने वाले सैलानियों ने जम्मू से शराब खरीद कर अपने सामान में रखना शुरु कर दी। उधर, जम्मू से खरीदी शराब कश्मीर में ज्यादा दामों में मिल ही रही थी।

चीयर्स डेस्क

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