अवैध शराब के खिलाफ अभियान के लिए होता है मौतों का इंतजार ?

हाल ही में यूपी के कुशीनगर और सहारनपुर में जहरीली शराब कांड से 114 लोगों की मौत हो गई थी, छ फरवरी 2019 को सबसे पहले कुशीनगर से जहरीली शराब से मौत की खबर आई थी, उसके बाद फिर सहारनपुर से। इसके बाद कई दिन तक लोगों के मरने की खबरें आती रहीं। इस कांड पर यूपी के डीजीपी श्री ओपी सिंह ने आठ फरवरी को कहा कि अवैध शराब के खिलाफ हम 365 दिन अभियान नहीं चला सकते। मिलावटी शराब के खिलाफ हमारा अभियान सतत रूप से चलता रहता है। उन्होंने उसी दिन यह भी कहा कि हम मीडिया को बताकर अभियान नहीं चला सकते।

दूसरी तरफ, सहारनपुर, कुशीनगर ज़हरीली शराब कांड को ध्यान में रखते हुए यूपी के अधिकांश जिलों के डीएम ने आबकारी, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीमें बनाने के निर्देश दिए थे कि ये टीमें 17 फरवरी तक लगातार अभियान चलाएंगी। याद रहे कि ये शराब कांड छ फरवरी से शुरु हुआ था। यानी अभियान अधिकतम 10 दिन ही चला होगा। हालांकि कुशीनगर, सहारानपुर जैसी दर्दनाक घटना के बाद यूपी पुलिस के ट्विटर एकाअंट पर अवैध शराब के सम्बंध में धरपकड़ से जुड़े विडियो और फोटो की बाढ़ सी आ गई थी। इससे साबित होता है कि यूपी के अधिकांश स्थानों पर मिलावटी अवैध शराब की फैक्ट्रियां लगी हुई हैं। कुशीनगर व सहारनपुर कांड के बाद हुई छापेमारी में 3.25 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई साथ ही 2.06 लाख लीटर लहन को भी नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा 1162 अवैध शराब की भटिठयों को भी ध्वस्त किया गया। करीहब 6365 मुकदमेे दर्ज किए गए तथा 6692 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

 

यहीं से अपने आप किसी के मन में भी सवाल आता है कि जब 10 दिन के अभियान में इतनी बड़ी तादाद में अवैध शराब पकड़ी जा सकती है तो ये अभियान अगर लगातार चले तो यूपी से अवैध शराब के उत्पादन को जड़ से समाप्त किया जा सकता है, लेकिन शायद यूपी पुलिस की मंशा ये नहीं है। गौरतलब है कि यूपी में पिछले करीब सात वर्षों में जहरीली शराब पीने से लगभग 304 लोगों की मौत हो चुकी है।

  •  12 जनवरी 2018 को बाराबंकी में जहरीली शराब पीने से नौ लोगों की मौत हो गई थी। इस मामलें में पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया। शासन स्तर पर तर्क दिया गया कि मौत स्प्रिट पीने से हुई है न कि अवैध शराब पीने से। लिहाजा आधिकारीयों के खिलाफ कार्रवाही नही की गई।
  • जुलाई 2017 में आजमगढ में अवैध शराब पीने से 25 लोंगो की जान गई थी। इस मामले में भी यह कहकर अफसरों का बख्श दिया गया था कि जिले में उनकी नियुक्ति को कुछ ही दिन पूर्व की गई है।
  •  मई 2018 में कानपुर के सचेंडी व कानपुर देहात में शराब से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई। इस मामलें में कुछ बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई जरूर हुई थी, मगर आंच लखनऊ तक नही पहुंच सकी।
  •  जनवरी 2018 बाराबंकी में 9 की मौत।
  • वर्ष 2016 में एटा में 24 की मौत।
  • वर्ष 2015 में लखनऊ व उन्नाव में 42 से अधिक की मौत।
  • वर्ष 2013 में आजमगढ के मुबारकपुर में 47 की मौत।
  • वर्ष 2011 में बाराणसी में 12 लोगो की मौत।

यूपी की राजधानी लखनऊ में जहरीली शराब से मौतों के आकड़े

  •  वर्ष 2005 में कैसरबाग क्षेत्र में हुई थीं 79 मौतें।
  •  वर्ष 2009 में लखनऊ बालू अडडे के पास दो लोगों की,  चौक स्टेडियम के पास दो महिलाओं की और गौसाईगंज में दो, चिनहट में एक व्यक्ति की मौत जहरीली शराब पीने से हो गई।
  • 16 जुलाई 2010 को लखनऊ के मलिहाबाद के तरौना गांव में एक की मौत।
  • 29 सितम्बर 2010 लखनऊ के मोहनलालगंज के गोविन्दपुर में दो की मौत।
  • वर्ष 2011 में लखनऊ के हसनगंज खदरा शिवपुरी में एक व्यक्ति की मौत, आधा दर्जन ने खोई आंख की रोशनी।
  • 12 जनवरी 2015 में मलिहाबाद के दतली गांव में शराब पीने से मलिहाबाद के 12, बंथरा के 4 व उन्नाव के 6 लोगों समेत 57 की मौत।

 

खुलेआम अवैध शराब का कारोबार

लखनऊ से हरदोई रोड पर माल के रामनगर गांव, मसीढ़ा नवीपनाह, थरी गांव, दलथंभा, रहटा, गहदौ, खरी, वीरपुर, दनौर, हऊमऊ, बाजार गांव, अकबरपुर, देवरी समेत कई अन्य गांवों में अवैध शराब के कारोबार का सूत्र दावा करते हैं। सूत्रों के अनुसार मोहनलालगंज के इंद्रजीत खेड़ा, ददियाना, कनकहा, जबरौली, जैतीखेड़ा, कोडहा, हुलास खेड़ा, खुजौली, सिसेंडी ओर फत्ते खेड़ा। गोसाईगंज के धुसवल, मौरा कला, मौरा खुर्द सूरियामऊ, अस्ती। चिनहट के दमादनपुरवा, गुलहरिया गांव और मलिहाबाद के घोला, जमोलिया, रामनगर, जानकीनगर, मोहज्जीनगर, सरैयां, अटिया, धना खेड़ा, कसमंडी, कैला खेड़ा गांवों में खुलेआम अवैध शराब का धंधा चलता रहता है।

धड़ल्ले से बिक रहे मुल्लू और ढीफा ब्रांड

सूत्रों के अनुसार मलिहाबाद के जमोलिया गांव में मुल्लु और ढीफा ब्रांड की अवैध जहरीली शराब धड़ल्ले से बिक रही है। यहां का आलम ये है कि अगर ग्रामीणों से मुल्लू या ढीफा ब्रांड का जिक्र करो तो वे लोग उस दिशा की ओर इशारा कर देते हैं जिधर ये दोनों ब्रांड बिक रहे होते हैं। इन दोनों के क्वार्टर यानी पव्वे का मूल्य 40 रूपये है।

शशांक तिवारी

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