अलग ज़ोन बनाने में भी की गई धोखा धड़ी

नियंत्रक महालेखा परीक्षक की हाल में जारी रिपोर्ट खुलासा करती है कि यूपी की पिछली सरकारों ने शराब की बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं। यूपी के आबकारी विभाग के अधिकारियों ने एक बड़े शराब व्यवसायी के इशारे पर जम कर यूपी के शराब उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाला।

रिपोर्ट कहती है कि पड़ोसी राज्यों से तस्करी रोकने के नाम पर मायावती सरकार में आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा मेरठ को विशिष्ट जोन बनाने के नाम पर घालमेल किए जाने का मामला सामने आया है। विशिष्ट जोन में उन जिलों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है, जिन जिलों की सीमा किसी पड़ोसी राज्य की सीमा से लगती ही नहीं है। जबकि नियमानुसार विशिष्ट जोन में उन जिलों को ही शामिल किए जाने का प्रावधान है, जिनकी सीमा पड़ोसी राज्य से लगती हो। इसी तरह देश में निर्मित विदेशी शराब एवं बियर की मनमाने तरीके से कीमत तय करके डिस्टिलरियों तथा ब्रेवरीज़ के अलावा थोक व फुटकर विक्रेताओं को 7,68.63 करोड़ का अनुचित लाभ पहुंचाने का मामला भी सामने आया है।

खास बात यह है कि विशिष्ट जोन के गठन और कीमतों के मनमाने तरीके से निर्धारण का खेल मायावती सरकार में शुरू होकर अखिलेश सरकार तक खूब चला। दरअसल, हरियाणा और राजस्थान से होने वाली शराब तस्करी रोकने के नाम पर यूपी में हुई घपलेबाजी को सीएजी ने पकड़ा। मायावती सरकार ने 2009 में ’उप्र आबकारी दुकानों के एकांतिक विशेषाधिकार के लिए विशिष्ट जोन का सीमांकन व विनियमन नियमावली’ बनाई थी। इसके तहत ही मेरठ को विशिष्ट जोन बनाया गया था। जिसमें गाजियाबाद, मुज्जफरनगर व मुरादाबाद समेत कुल 5 जिलों का शामिल किया गया था।

हालांकि बाद में इन जिलों के विभाजन से ही तीन और नए जिले संभल, हापुड़ और शामली बन गए। जिससे विशिष्ट जोन में शामिल जिलों की संख्या 78 हो गई। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने विशिष्ट जोन में सात ऐसे जिलों बदायूं, संभल, बुलंदशहर, ज्योतिबा फुले नगर, मेरठ, हापुड़ व शाहजहांपुर को भी शामिल कर दिया जो किसी भी राज्य की सीमा से नहीं लगे हैं। जबकि दूसरे राज्यों की सीमा से सटे 25 ऐसे जिले भी थे, जिनको विशिष्ट जोन में शामिल ही नहीं किया गया।

चीयर्स डेस्क 

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