अब देना होगा पानी का हिसाब

देश में प्रदूषित होते भूजल पर एनजीटी ने कड़ा रुख इख़्तियार किया है। उद्योगों  से निकलने वाले पानी के भूजल में मिलने से न सिर्फ भूजल दूषित हो रहा है बल्कि पीने के पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है।  इसी के तहत एनजीटी ने स्लॉटर हाऊस, फूड प्रोसेसिंग इकाइयों सहित ऐसे सभी उद्योग जिनसे भारी मात्र में पानी को निस्तारित किया जाता है, उन्हें अब पानी का हिसाब-किताब रखना होगा। उद्योग जितने पानी की खपत करेंगे, उसकी रीसाइक्लिंग कर फैक्ट्री के कार्यों में उपयोग करना भी अनिवार्य होगा। यही नहीं, यदि उद्योग अपना उपचारित (ट्रीटमेंट) पानी कृषि उपयोग के लिए करेंगे तो उस पर भी निगाह रखी जाएगी।

एनजीटी ने अलीगढ़ की अल दुआ फूड प्रोसेसिंग इकाई की ओर से पर्यावरण नियमों के उल्लंघन मामले में शैलेश सिंह की याचिका पर उद्योगों के लिए सख्त आदेश पारित किए हैं। यह नियम पूरे देश में लागू होंगे। सभी राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऐसे उद्योगों को पर्यावरणीय अनुमति देते समय इन आदेशों का कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करेंगे।

एनजीटी के मुताबिक, सभी इकाइयों के लिए सिंचाई प्रबंधन योजना बनाकर उसे लागू करना अनिवार्य होगा। योजना के तहत उपचारित औद्योगिक पानी से कैंपस की सिंचाई व्यवस्था उद्योगों को करनी होगी। साथ ही बढ़ते भूजल प्रदूषण को देखते हुए एनजीटी ने यह आदेश भी दिया है कि ऐसे उद्योगों के इर्द गिर्द भूजल गुणवत्ता पर नजर रखते हुए उसका सघन मॉनीटरिंग की जाए। दरअसल, प्रदूषित प्रवाह के भूजल स्नोतों में रिसने से पेयजल व फूड चेन में प्रदूषित तत्व पहुंच कर मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। यह भी आदेश दिए गए गए हैं कि उद्योगों से निकलने वाले पानी में निर्धारित मानकों का अनुपालन अनिवार्य रूप से कराया जाए। बोर्ड को यह भी देखना होगा कि ऐसे उद्योग अपना उत्प्रवाह किसी भी हालत में जलीय स्नोत अथवा खुले मैदान में निस्तारित न करें। एनजीटी ने उक्त फूड प्रोसेसिंग इकाई को 10 लाख की बैंक गारंटी के साथ सभी पर्यावरण मानकों का अनुपालन करने के भी निर्देश दिए हैं।

चीयर्स डेस्क 

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