अप्रैल आया, दाम बढ़े, बाजार से कई ब्रांड गायब

नया वित्तीय वर्ष हर साल शराब उपभोक्ताओं के लिए मुश्किल भरा होता है, शराब के अधिकतर ब्रांड बाजार से गायब होते हैं। दुकानदार की मर्ज़ी पर पीना होती है शराब। आखिर क्यों, क्यों इस समस्या का समाधान अभी तक नहीं निकला। क्यों अभी तक ऐसी व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई कि आखिरी क्यों मार्च और अप्रैल के शुरु में शराब उपभोक्ताओं की मनपसंद शराब नहीं मिल सकती। बात इतनी हो तब भी ठीक है, इन दिनों शराब की शार्टेज होती है तो बड़े शहरों को छोड़ कर बाकी दुकानों पर अंग्रेजी में देशी की मिलावट भी बड़े पैमाने पर इन्हीं दिनों होती है। इतना ही नहीं हर साल अप्रैल से शराब के दामों में भीं बढ़ोत्तरी हो जाती है।

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लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, झांसी, आजमगढ़, वाराणसी और कानपुर समेत पूरे उत्तर प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन अधिकतर दुकानों पर शराब और बीयर के बहुत से ब्रांड गायब रहे। इसके कारण मॉडल शॉप और बाॅर में बंदी जैसा माहौल रहा। एक अप्रैल से देशी शराब के दाम तो नहीं बढ़े, लेकिन अंग्रेजी शराब के साधारण ब्रांड और बीयर के दामों में काफी वृद्धि दर्ज की गई। आबकारी विभाग ने नए वित्तीय वर्ष में करीब 29 हजार करोड़ रुपए राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है। आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार कई ब्रांड्स की किल्लत एक-दो दिन में दूर हो जाएगी।

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सहारनपुर, नोएडा से हमारे संवाददाता नीरज महेरे ने बताया कि इन जिलों में भी शराब की खपत अनुसार सप्लाई नहीं हो पा रही है। आबकारी विभाग की शिथलता से जहां शराब उपभोक्ता परेशान हैं वहीं दुकानदारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आजमगढ़ स्थित हमारे पूर्वांचल के संवाददाता संदीप अस्थाना ने बताया कि पूर्वांचल के जिलों में भी शराब की खपत के बराबर शराब उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कारण वही है कि आबकारी विभाग वित्तीय वर्ष के अंत में कागजी औपचारिकतओं की लालफीता शाही में उलझा रहता है और ठेकेदारों को समय से आपूर्ति के कागज़ उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।

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दूसरी तरफ हर साल की इस दिक्कत से निपटने के लिए दुकानदारों ने पहले से शराब को गोदामों में शराब जमा कर लेते हैं। एक स्थानीय दुकानदार ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि चुनाव के समय में शराब की खपत बढ़ जाती है। सप्लाई नहीं मिल पाने के कारण अवैध शराब से जुड़े लोग अपनी अवैध शराब को खपाने में लगे रहते हैं। अंग्रेजी में देशी की मिलावट का भी यही सबसे अच्छा समय होता है। मांग इतनी ज्यादा रहती है कि उसे पूरा करनें के लिए शराब में मिलावट का पता ही नहीं चल पाता है। कई बार यही मिलावट भरी शराब कुशीनगर और सहारनपुर जैसी दुर्घटनाओं का कारण बनती है।

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आबकारी विभाग से प्रदेश में करीब 17 हजार फुटकर दुकानों का नवीनीकरण और 7938 दुकानों का लाइसेंस ई-लॉटरी के जरिए किया गया है। बची फुटकर दुकानों के लिए चैथे चरण की लॉटरी दो अप्रैल को होगी। पहली अप्रैल से यूपी में कई बदलावों के साथ शराब की दुकानों पर बिक्री शुरू हुई। शासन के निर्देश पर पिछले साल से लागू हुए गो कल्याण सेस के कारण शराब निर्माता कंपनियों पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स का सीधा असर शराब उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है।

10 से 80 रुपये तक बढ़े दाम

अलग अलग ब्रांड की शराब के दामों दाम में किसी में कम तो किसी में ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, दुकानों पर एक-दो ब्रांड ही पहुंचे हैं, जिसमें 10 से लेकर अस्सी रुपए तक की वृद्धि देखने को मिली है। लखनऊ शराब असोसिएशन के महासचिव कन्हैया लाल मौर्य ने बताया कि सोमवार को थोक दुकानों पर ब्रांड न होने से फुटकर बिक्री न के बराबर रही। दुकानों को 8 पीएम और मैक डावल नंबर वन जैसे कुछ एक दो ब्रांड ही बिक्री के लिए मिले। इसके अलावा कुछ थोक दुकानों पर तीसरा ब्रांड ब्लेंडर्स प्राइट भी मिला। एक विक्रेता ने बताया कि 8 पीएम और मैक डावल नंबर वन के पउवे पर दस रुपए और बोतल पर चालीस रुपए की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह ब्लेंडर्स प्राइट की बोतल अस्सी रुपए महंगी होकर 880 रुपए की हो गई है।

चीयर्स डेस्क

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